Shri Bade Baba Kundalpur Chalisa बड़े बाबा कुंडलपुर चालीसा

आज हम सब कुंडलपुर में विराजित बड़े बाबा की आराधना के लिए Shri Bade Baba Kundalpur Chalisa बड़े बाबा कुंडलपुर चालीसा का पाठ श्रद्धापूर्वक करेंगे.

कुंडलपुर मध्यप्रदेश के दमोह जिले के कुंडलगिरी में स्थित है. जैन धर्म के अनुयायियों के लिए यह बहुत बड़ा तीर्थ स्थल है.

यहाँ बड़े बाबा विराजित हैं. आप सबको बता दें की यहाँ आदिनाथ भगवान विराजतें हैं, जिन्हें हम सब श्रद्धापूर्वक बड़े बाबा के रूप में पुजतें हैं.

बड़े बाबा की महिमा अत्यंत ही निराली है. बाबा सभी के दुःख दर्द दूर करतें हैं.

चलिए अब हम सब श्रद्धापूर्वक श्री बड़े बाबा कुंडलपुर चालीसा का पाठ आरम्भ करतें हैं.

प्रेम से बोलिए बड़े बाबा कुंडलपुर वाले की …… जय जय.

Shri Bade Baba Kundalpur Chalisa बड़े बाबा कुंडलपुर चालीसा

Bade Baba Kundalpur

|| श्री बड़े बाबा कुंडलपुर वाले की चालीसा ||

दुःख हरन मंगल करन, महावीर भगवान।
तिनके चरणाविंद को बार-बार प्रणाम।

श्री धर केवली मोक्ष गये, कुण्डल गिरी से आय।
तिनके पद को वंदते, पाप क्लेश मिट जाय।

बड़े बाबा का सुमरे नामा, पूरन होवे बिगड़े कामा।
जिसने नाम जपा प्रभु तेरा, उठा वहां से कष्ट का डेरा।

बड़े बाबा का जो ध्यान लगावें, रोग दुःख से मुक्ति पावे।
जीवन नैया फसी मझधार, तुम ही प्रभु लगावो पार।

आया प्रभु तुम्हारे द्वार, अब मेरा कर दो उद्धार।
राग द्वेष से किया किनारा, काम क्रोध बाबा से हारा।

सत्य अहिंसा को अपनाया, सच्चे सुख का मार्ग दिखाया।
बड़े बाबा का अतिशय भारी, जिसको जाने सब नर नारी।

भूत प्रेत तुम से घबराये, शंख डंकनी पास न आवे।
बिन पग चले सुनह बिन काना, सुमरे प्राणी प्रभु का नामा।

जिस पर कृपा प्रभु की होई, ताको दुर्लभ काम न कोई।
अतिशय हुआ गिरी पर भारी, जब श्रावक के ठोकर मारी।

एक श्रावक ठोकर खाता था, जब पर्वत से आता जाता था।
व्यापर करने को नित्य प्रति जाता, पर्वत था ठोकर खाता।

संयम और संतोष का धारक, श्रावक था जिन धर्म का पालक।
ठोकर का ध्यान दिन में रहता, फिर भी पत्थर से भिड़ जाता।

क्यों न ठोकर का अंत करुँ, पथिकों का दुःख दूर करुँ।
ले कुदाल पर्वत पर आया, पर पत्थर को खोद न पाया।

खोदत खोदत वह गया हार, पर पत्थर का न पाया पार।
अगले दिन आने का प्रण कर लौट गया वह अपने घर पर।

स्वप्न में सुनी देवी की वाणी, मत बन रे श्रावक अज्ञानी।
जिसको तू ठोकर समझा है, ठोकर नहीं प्रभु का उत्तर है।

मूरत खोद निकालू मैं जाकर, तुम आ जाना गाड़ी लेकर।
विराजमान गाड़ी पर कर दूंगा, और ग्राम तक पहुंचा दूंगा।

ध्यान ह्रदय में इतना रखना,अतिशय को पीछे मत लखना।
देव जातिखन श्रावक जागा, गाड़ी ले पर्वत को भागा।

चहुँ दिश छाई छटा सुहानी, फ़ैल रही चंदा की चांदनी।
देव दुंदभि बजा रहे थे, पुष्प चहुँ दिश बरसा रहे थे।

देवों ने प्रतिमा काड़ी और और प्रभु की महिमा भाखी।
प्रभु मूरत गाड़ी पर राखी, श्रावक ने तब गाड़ी हांकी।

पवन गति से गाड़ी चली, प्रभु मूरत तनिक न हाली।
श्रावक अचरज में डूब गया, प्रभु दर्शन को पलट गया।

तत्क्षण उसका अंत हुआ, भवसागर से बेड़ा पार हुआ।
जैन समाज पहुंचा पर्वत पर, मंदिर बनवाया शुभ दिन लखकर।

सूरत है मन हरने वाली, पद्मासन है मूरत काली।
मन इच्छा को पूरी करते, खाली झोली को प्रभु भरते।

बड़े बाबा बाधा को हरते, बिगड़े काम को पूरा करते।
मनकामेश्वर नाम तिहारा, लगे ह्रदय को प्यारा प्यारा।

प्रभु महिमा दिल्ली तक पहुंची, दिल्लीपति ने दिल में सोची।
क्यों न मूरत को नष्ट करू, झूठे अतिशय को दूर कर।

दिल्लीपति था बड़ा अभिमानी, मूरत तोड़ने की दिल में ठानी।
लशकर ले पर्वत पर आया, जैन समाज बहुत घबराया।

छेनी लगा हथौड़ी घाला, मधु बर्रो ने हमला बोला।
नख से बहे दूध की धारा, जाको मिले न पारम पारा।

अतिशय देख सेना घबराई, मधु बर्रो ने धूम मचाई।
रहम रहम करके चिल्लाया, सारी जनता ने हर्ष मनाया।

सेनापति ने शीश झुकाया, सीधा दिल्ली को तब आया।
अहंकार सब चूर हो गया, प्रभु अतिशय में स्वयं खो गया।

क्षत्रसाल ने पांव पखारे, जय बाबा करके जैकारे।
करी याचना अपनी जीत की, मंदिर के जीर्णोद्धार करन की।

भर उत्साह में हमला बोला, बड़े बाबा का जयकारा बोला।
शत्रु को फिर धूल चटाई, आ मंदिर में ध्वजा फहराई।

मंदिर का जीर्णोद्धार किया, दान दक्षिणा भरपूर दिया।
जो प्रभु चरणों में शीश झुकाये, दुःख संताप से मुक्ति पाये।

सोरठा

चालीसा चालीस दिन पढ़े, कुण्डल गिरी में आप।
वंश चले और यश मिले, सुख सम्पत्ति धन पाय।

करें आरती दीप से, प्रभु चरणों में ध्यान लगाय।
भक्ति भाव पूजन करें, इच्छा मन फल पाय।

पंच परमेष्ठी की स्तुति करें – Panch Parmeshthi Ki Aarti | पंच परमेष्ठी की आरती

विडियो

बड़े बाबा कुंडलपुर चालीसा (Shri Bade Baba Kundalpur Chalisa) यूट्यूब विडियो हमने निचे दिया हुआ है. श्रद्धापूर्वक इस विडियो को आप सब देखें.

श्री बड़े बाबा कुंडलपुर चालीसा

कुंडलपुर वाले बड़े बाबा की भक्ति करें. बाबा अवस्य ही आपके सभी कष्टों को दूर करेंगे.

Importance of Bade Baba Kundalpur Chalisa

कुंडलपुर बड़े बाबा चालीसा का महत्व

  • बड़े बाबा कुंडलपुर वाले की महिमा बहुत निराली है.
  • कुंडलपुर वाले बड़े बाबा की आराधना के लिए उनकी चालीसा का पाठ करना अत्यंत ही महत्वपूर्ण माध्यम है.
  • धार्मिक मान्यता है की बड़े बाबा चालीसा का पाठ करने से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिल जाती है.
  • शारीरिक रोगों से बड़े बाबा मुक्ति देतें हैं.
  • दिन दुखियों की सभी पीड़ा बड़े बाबा हर लेतें हैं.
  • सम्पूर्ण श्रद्धापूर्वक बड़े बाबा कुंडलपुर चालीसा (Shri Bade Baba Kundalpur Chalisa) का पाठ करने से समस्त बिगड़े काम बन जातें हैं.

आप सब भक्तिपूर्वक श्री कुंडलपुर वाले बड़े बाबा की आराधना और स्तुति करें.

बड़े बाबा का तीर्थ स्थल कहाँ स्थित है?

मध्य प्रदेश के दमोह के कुंडलपुर में बड़े बाबा का तीर्थ स्थल स्थित है. यह अत्यंत ही पवित्र जैन तीर्थ स्थल है.

कुंडलपुर के बड़े बाबा के रूप में किसकी पूजा की जाती है?

कुंडलपुर में बड़े बाबा के रूप में भगवान श्री आदिनाथ जी की पूजा की जाती है.

आज के इस महत्वपूर्ण प्रकाशन को हम यहीं समाप्त कर रहें हैं. किसी भी प्रकार के विचार, सुझाव और सलाह के लिए आप हमें कमेंट बॉक्स में लिख सकतें हैं.

कुछ और महत्वपूर्ण प्रकाशन –

Adinath Chalisa आदिनाथ चालीसा – प्रथम तीर्थंकर की आराधना

Mahaveer Chalisa महावीर चालीसा – 24वें तीर्थंकर की स्तुति

Parshwanath Chalisa | श्री पार्श्वनाथ चालीसा

Shri Suparshvanath Chalisa | श्री सुपार्श्वनाथ चालीसा | Suparasnath Chalisa

Padamprabhu Chalisa पदम प्रभु चालीसा पद्मप्रभ जी की स्तुति

Leave a Reply

Your email address will not be published.