Mahaveer Chalisa महावीर चालीसा – 24वें तीर्थंकर की स्तुति

Mahaveer Chalisa, Mahavir Chalisa | महावीर चालीसाजैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर हैं. इस पोस्ट में हम भगवान श्री महावीर जी की आराधना और स्तुति के लिए चालीसा का प्रकाशन कर रहें हैं.

आप सब सम्पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री महावीर चालीसा का पाठ करें.

भगवान महावीर ने इस जगत को सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह,अचौर्य, और ब्रह्मचर्य की शिक्षा दी. उनके द्वारा दी गयी शिक्षा आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

महावीर जी का जन्म कुंडग्राम वैशाली में हुआ था और इन्होने पावापुरी, नालंदा में मोक्ष को प्राप्त किया था.

भगवान महावीर जी का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ था. इनके पिता का नाम राजा सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशला था.

हम सबको भगवान महावीर की दी हुई शिक्षा को हृदय से अपनाना चाहिए. इस संसार को आज सत्य और अहिंसा की सबसे अधिक आवश्यकता है.

अब हम भगवान महावीर जी की आराधना और स्तुति के लिए श्री महावीर चालीसा (Mahaveer Chalisa) का पाठ आरम्भ करतें हैं.

Mahaveer Chalisa महावीर चालीसा

mahavir

|| श्री महावीर चालीसा ||

शीश नवा अरिहन्त को, सिद्धन करूँ प्रणाम |
उपाध्याय आचार्य का, ले सुखकारी नाम |

सर्व साधु और सरस्वती, जिन मन्दिर सुखकार |
महावीर भगवान को, मन-मन्दिर में धार |

जय महावीर दयालु स्वामी, वीर प्रभु तुम जग में नामी |
वर्धमान है नाम तुम्हारा, लगे हृदय को प्यारा प्यारा |

शांति छवि और मोहनी मूरत, शान हँसीली सोहनी सूरत |
तुमने वेश दिगम्बर धारा, कर्म-शत्रु भी तुम से हारा |

क्रोध मान अरु लोभ भगाया, महा-मोह तुमसे डर खाया |
तू सर्वज्ञ सर्व का ज्ञाता, तुझको दुनिया से क्या नाता |

तुझमें नहीं राग और द्वेष, वीर रण राग तू हितोपदेश |
तेरा नाम जगत में सच्चा, जिसको जाने बच्चा बच्चा |

भूत प्रेत तुम से भय खावें, व्यन्तर राक्षस सब भग जावें |
महा व्याध मारी न सतावे, महा विकराल काल डर खावे |

काला नाग होय फन धारी, या हो शेर भयंकर भारी |
ना हो कोई बचाने वाला, स्वामी तुम्हीं करो प्रतिपाला |

अग्नि दावानल सुलग रही हो, तेज हवा से भड़क रही हो |
नाम तुम्हारा सब दुख खोवे, आग एकदम ठण्डी होवे |

हिंसामय था भारत सारा, तब तुमने कीना निस्तारा |
जनम लिया कुण्डलपुर नगरी, हुई सुखी तब प्रजा सगरी |

सिद्धारथ जी पिता तुम्हारे, त्रिशला के आँखों के तारे |
छोड़ सभी झंझट संसारी, स्वामी हुए बाल-ब्रह्मचारी |

पंचम काल महा-दुखदाई, चाँदनपुर महिमा दिखलाई |
टीले में अतिशय दिखलाया, एक गाय का दूध गिराया |

सोच हुआ मन में ग्वाले के, पहुँचा एक फावड़ा लेके |
सारा टीला खोद बगाया, तब तुमने दर्शन दिखलाया |

जोधराज को दुख ने घेरा, उसने नाम जपा जब तेरा |
ठंडा हुआ तोप का गोला, तब सब ने जयकारा बोला |

मंत्री ने मन्दिर बनवाया, राजा ने भी द्रव्य लगाया |
बड़ी धर्मशाला बनवाई, तुमको लाने को ठहराई |

तुमने तोड़ी बीसों गाड़ी, पहिया खसका नहीं अगाड़ी |
ग्वाले ने जो हाथ लगाया, फिर तो रथ चलता ही पाया |

पहिले दिन बैशाख बदी के, रथ जाता है तीर नदी के |
मीना गूजर सब ही आते, नाच-कूद सब चित उमगाते |

स्वामी तुमने प्रेम निभाया, ग्वाले का बहु मान बढ़ाया |
हाथ लगे ग्वाले का जब ही, स्वामी रथ चलता है तब ही |

मेरी है टूटी सी नैया, तुम बिन कोई नहीं खिवैया |
मुझ पर स्वामी जरा कृपा कर, मैं हूँ प्रभु तुम्हारा चाकर |

तुम से मैं अरु कछु नहीं चाहूँ, जन्म-जन्म तेरे दर्शन पाऊँ |
चालीसे को चन्द्र बनावे, बीर प्रभु को शीश नवावे |

सोरठा :

नित चालीसहि बार, बाठ करे चालीस दिन |
खेय सुगन्ध अपार, वर्धमान के सामने | |

होय कुबेर समान, जन्म दरिद्री होय जो |
जिसके नहिं संतान, नाम वंश जग में चले | |

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विडियो

भगवान श्री महावीर जी की आराधना और स्तुति के लिए हमने महावीर चालीसा (Mahavir Chalisa) यूट्यूब विडियो निचे दिया हुआ है. इस विडियो को प्ले बटन दबाकर देख सकतें हैं.

श्री महावीर चालीसा

विडियो श्रोत – यूट्यूब

भगवान महावीर जी के अन्य नाम कौन से हैं?

भगवान महावीर जी के अन्य नाम वीर, अतिवीर, वर्धमान, सन्मति हैं.

श्री महावीर जी का जन्म कहाँ हुआ था?

श्री महावीर जी का जन्म कुंडग्राम वैशाली में हुआ था.

भगवान महावीर ने कौन से वंश में जन्म लिया था?

भगवान महावीर जी ने इक्ष्वाकु वंश में जन्म लिया था.

श्री महावीर जी के माता पिता का क्या नाम था?

श्री महावीर जी के माता का नाम त्रिशला और पिता का नाम राजा सिद्धार्थ था.

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